नहीं सुधर रहे अस्पतालों के हालात

बलरामपुर । प्रदेश सरकार भले ही ग्रामीण अस्पतालों की व्यवस्था सुधारने के नाम पर लाखों रुपये पानी की तरह बहा रही हो लेकिन, अफसरों की कार्यशैली से उसकी मंशा परवान नहीं चढ़ पा रहा है। दवाओं का अभाव है। चिकित्सक के अभाव में मरीजों को झोलाछाप से इलाज कराना पड़ रहा है। बावजूद इसके अफसर धरातल पर उतरने को तैयार नहीं है। सूत्रों की मानें तो दवाओं के नाम पर खेल किया जा रहा है। अधिकारी सब कुछ जानते हुए कार्रवाई किए जाने से करीब एक लाख लोगों के स्वास्थ्य की जिम्मेदारी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बलदेवनगर पर है। जो अव्यवस्थाओं से जूझ रहा है। एक वर्ष पूर्व डॉ. संतोष कुमार ने पदभार ग्रहण किया था लकिन, इसके बाद वह अस्पताल नहीं आए। अस्पताल का विद्युतीकरण नहीं हो सका है। जिससे अस्पताल में दवाओं का रख-रखाव नहीं हो पाता है। परिसर में स्थित पानी टंकी खराब है। प्रसव केंद्र के बाहर लगा हैंडपंप व मोटर खराब भी है। तीन दिन पहले इंडिया मार्का हैंडपंप लगा है।उसकी फर्श नहीं बन सकी है। अस्पताल की फर्श टूटी है। अस्पताल का बाउंड्रीवाल अधूरा है। जिससे छुट्टा जानवर घुस आते हैं। शुक्रवार को चीफ फार्मेसिस्ट अब्दुल बारी मरीज देखते मिले। पांच मरीजों का वह इलाज कर चुके थे। अस्पताल में सांप व कत्ता काटने की दवाएं नहीं है। इसके लिए मरीजों 15 किलोमीटर दूरी तय कर सीएचसी शिवपुरा जाना पड़ता है। स्टाफ नर्स गीता त्रिपाठी व सोहन लाल छुट्टी पर होना बताए गए। महरूप ने बताया कि अस्पताल में प्रसव के लिए सुविधा शुल्क अदा करना पड़ता " का होने से इलाज के लिए जिला मख्यालय जाना पड़ता है ।बाबराम ने बताया कि मरीजों को मुख्यालय जाना पड़ता है। सीएचसी शिवपुरा अधीक्षक डॉ. प्रणव पांडेय ने बताया कि डॉ. संतोष कुमार की उपस्थिति नहीं भेजी जा रही है। उनके अस्पताल न आने की सूचना उच्चाधिकारी को दी जा चुकी है।